इस कारण हनुमान में भी आया था अंहकार, जानिए उनका घमंड किसने चूर किया था

सभी ने रामायण तो पढ़ी ही होगी और इन पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ऐसा भी आया था जब हनुमान जी को घमंड आ गया था। अब कई लोग कहेंगे हनुमान जी में तो घमंड था ही नहीं मैं यह बात से इंकार नहीं करता, मगर हम आपको जो बताएगें उसमें आप जान सकेंगे
 
इस कारण हनुमान में भी आया था अंहकार, जानिए उनका घमंड किसने चूर किया था

सभी ने रामायण तो पढ़ी ही होगी और इन पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ऐसा भी आया था जब हनुमान जी को घमंड आ गया था। अब कई लोग कहेंगे हनुमान जी में तो घमंड था ही नहीं मैं यह बात से इंकार नहीं करता, मगर हम आपको जो बताएगें उसमें आप जान सकेंगे कि हनुमान जी का घमंड कैसे आया था और हम ना ही किसी की आस्था को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। तो कृपया करके हमें गलत समझने की कोशिश ना करें।

कथा उस समय की है जब राम जी तथा उनकी सेना को लंका जाना था, मगर अड़चन यह आई थी सागर में से कैसे जाया जाए। और जब समुंदर के देवता ने कहा कि आप सेतु बनाए। तो राम जी को सेतु पर शिवलिग स्थापित करने का विचार आया। और फिर उन्होंने हनुमान जी से कहा कि शुभ मुहूर्त देकर काशी जाकर शिवलिग ले आओ। हनुमान जी तुरंत काशी पहुंच गए।

मगर मुहूर्त बीतने के कारण श्री राम जी ने सुग्रीव को बुलाया और कहा कि मुहूर्त बीतने वाला आता है तो हमें रेत से बना कर एक शिवलिग स्थापित करना चाहिए।कुछ ही समय में हनुमान जी भी श्री राम के पास पहुंच गए और उन्होंने श्री राम से कहा कि मुझे काशी भेज कर आपने ऐसा क्यों किया प्रभु?

श्री राम जी कहते हैं मुझसे भूल हो गई प्रिया हनुमान मेरे द्वारा स्थापित इस बालू के शिवलिंग को उखाड़ दो और तुम्हारे लाये हुए शिवलिग को स्थापित करते हैं। हनुमान जी ने तुरंत अपनी पूंछ से शिवलिंग को लपेटकर उखाड़ने का प्रयास किया मगर शिवलिंग तनिक भी टस से मस नहीं हुआ। हनुमान जी तुरंत समझ गए कि यह मेरी मूर्खता है और उन्होंने श्री राम जी के चरण पकड़ लिये और अपनी नादानी के लिए क्षमा मांगी।

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