ऐसा महान सम्राट जिसने अहिंसा के पथ पर चलते हुए समस्त भारत को एक सुत्र में बांध कर रखा

आज हम आपको भारत के एक ऐसे महान सम्राट के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अहिंसा के पथ पर चलते हुए समस्त भारत को एक सूत्र में बांध दिया था। वो केवल भारत के ही नहीं दुनिया के महान सम्राटों में से एक था। प्रियदर्शी अशोक-अशोक बिंदुसार का पुत्र और चन्द्रगुप्त मौर्य का
 
ऐसा महान सम्राट जिसने अहिंसा के पथ पर चलते हुए समस्त भारत को एक सुत्र में बांध कर रखा

आज हम आपको भारत के एक ऐसे महान सम्राट के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अहिंसा के पथ पर चलते हुए समस्त भारत को एक सूत्र में बांध दिया था। वो केवल भारत के ही नहीं दुनिया के महान सम्राटों में से एक था।

प्रियदर्शी अशोक-अशोक बिंदुसार का पुत्र और चन्द्रगुप्त मौर्य का पोत्र था। बौद्ध- ग्रन्थ दीपवंश और महावंश के अनुसार बिन्दुसार की 16 रानिया और 101 पुत्र थे। अशोक का राज्यभिषेक 269ई.पू.के लगभग हुआ।

261ई.पू. अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया और अपने अधीन कर लिया। कश्मीर,पंजाब,कालिंजर और अन्य प्रदेशो को अपने अधीन किया और एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की और उस पर 40 वर्षो तक सफलतापूर्वक शासन किया। कलिंग-युद्ध के पश्चात अशोक ने बौद्ध-धर्म स्वीकार कर लिया।

अशोक न केवल भारतीय इतिहास में ही महान सम्राट कहलाता है, बल्कि वह विश्व के सम्राटों में महान सम्राट के पद को सुशोभित करता है।अर्थात, विश्व के समस्त सम्राटों में अद्वितीय है। प्रत्येक युग और प्रत्येक राष्ट्र में ऐसे सम्राट उत्पन्न नही होते।

अशोक का साम्राज्य- उत्तर-पश्चिम में हिन्दू-कुश से पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में हिमालय की तराई से दक्छिण में चितलदुर्ग तक फैला हुआ था।

विवाह-अशोक की कई रानिया थीं जिनमें देवी नामक पत्नी अधिक प्रसिद्ध है। दूसरी पत्नी पद्मावती थी जिससे कुणाल नामक पुत्र उत्पन्न हुआ था।

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