ऐसा देश जहाँ नवविवाहित जोड़े को तीन दिनों तक नहीं होती शौचालय प्रयोग करने की अनुमति

भारत में ही नही अपितु सारी दुनिया में हर जगह शादी को लेकर अपने- अपने तरीके के रीति-रिवाजो को अपनाया जाता है या कहें की हर देश और उसमे रहने वाले समुदायों के शादी के समय अपने- अपने रीती- रिवाज होते है पर आज हम जिस तरह के रिवाज के बारे में आपको बताने जा
 
ऐसा देश जहाँ नवविवाहित जोड़े को तीन दिनों तक नहीं होती शौचालय प्रयोग करने की अनुमति

भारत में ही नही अपितु सारी दुनिया में हर जगह शादी को लेकर अपने- अपने तरीके के रीति-रिवाजो को अपनाया जाता है या कहें की हर देश और उसमे रहने वाले समुदायों के शादी के समय अपने- अपने रीती- रिवाज होते है पर आज हम जिस तरह के रिवाज के बारे में आपको बताने जा रहे है. शायद इसके बारे में आप आज तक अनजान हो और इसकी जानकारी भी न रखते हो पर चिंता की कोई बात नहीं है,

आज हम आपको इस अनोखे तरीके के रिवाज के बारे में आपको जानकारी देंगे, जिसे जानने के बाद आप निश्चित ही यह सोचने के मजबूर हो जायँगे कि यह कोई रिवाज है या फिर टॉर्चर।

शादी से जुड़े जिस रिवाज के बारे में हम बात कर रहे है, यह अजीब सी परंपरा इंडोनेशिया में अपनाई जाती है. जिसके तहत नवविवाहित जोड़े को शादी के तीन दिन बाद तक वाशरूम का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं रहती है. और सबसे हैरानी की बात यह है कि इन तीन दिनों तक इस न्यूड कपल पर सख्त निगरानी रखी जाती है. जिससे कि वो नियम तोड़ने की कोशिश न कर सके.

मान्यतायें क्या कहती इस परंपरा के बारे में :- इस परम्परा के अंतर्गत नवविवाहित जोड़े को तीन दिन और तीन रातों तक शौचालय का प्रयोग करना वर्जित होता है. इस प्रथा से जुडी मान्यता है कि इस परम्परा को पूर्ण करने वाले जोड़े भाग्यशाली साबित होते है यह भी माना जाता है कि इस तरह का जोड़े विवाह के आधे समय पर ही टूटने, या कहें कि किसी भी तरह के वैवाहिक समस्याओं से आसानी से निपटने के लिए सक्षम हो जाते है और अपने जीवन को आसानी से जीने के योग्य बन जाते है.

कहाँ है इस तरह की मान्यता और कौन मानते है इसे :- दरअसल इस तरह की विचित्र प्रथा इंडोनेशिया में नये जोड़े को अपनानी पड़ती है जिसमे कि उन्हें तीन दिनों तक शौचालय का प्रयोग करना वर्जित होता है इंडोनेशिया में इस विचित्र तरह की प्रथा को टिडोंग समुदाय के लोग अपनाते है. इस समुदाय के लोग इस रिवाज को बहुत ही गंभीरता से लेते है.हालांकि हम इसे गलत कहें पर यह परम्परा प्रमुखतः टिडोंग जनजाति के लोगो के लिये बहुत ही स्वस्थ और प्राकृतिक प्रतीत होती है।

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