वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

रोचक बातें : सरदार भगत सिंह भारत मातृभूमि के ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने देश के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया था | युवा पीढ़ी को सरदार भगत सिंह के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है | उन्होंने अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की और अंग्रेजों के लिए
 
वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

रोचक बातें : सरदार भगत सिंह भारत मातृभूमि के ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने देश के लिए अपना पूरा जीवन न्योछावर कर दिया था | युवा पीढ़ी को सरदार भगत सिंह के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है | उन्होंने अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की और अंग्रेजों के लिए वे एक बड़ी समस्या बन गये थे | आइये जानते हैं इनके बारे में कुछ ऐसे रोचक तथ्य, जिनके बारे में कम लोगों को मालूम है |

वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

1: वीर भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 के दिन पंजाब के लायलपुर जिले में एक सिख परिवार में हुआ था। आज के समय में लायलपुर अब पाकिस्तान का हिस्सा है |

2: भगत सिंह ने जेल में कुल 64 दिनों तक भूख हड़ताल की थी | इस दौरान उनके एक मित्र “यतीन्द्रनाथ दास” की भूख के कारण मौत हो गयी थी |

वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

3: इंकलाब जिंदाबाद के नारा सबसे पहले सरदार भगत सिंह ने दिया था |

4: सरदार भगत सिंह ने अपने साथी राजगुरु के साथ मिलकर में अंग्रेज़ अधिकारी सांडर्स को मार दिया था |

5: भगत सिंह ने लगभग 2 वर्षों का समय जेल में बिताया था |

वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

6: जलियावाला बाग में हुए नरसंहार के दौरान सरदार भगत सिंह की आयु केवल 12 वर्ष की ही थी | उस भयावह मंजर को देखकर भगत सिंह को क्रांतिकारी बनने की प्रेरणा मिली थी |

वीर सपूत और बुलंद आवाज वाले शहीद भगत सिंह के बारे में 8 रोचक बातें

7: न्यायाधीश “जी सी हिल्टन” ने सरदार भगत सिंह और उनके दोनों साथियों को अदालत में फांसी की सजा सुनाई थी। महात्मा गांधी अगर चाहते तो भगत सिंह और उनके साथियों को बचा सकते थे लेकिन उनके इस घटना पर गाँधी के विचार आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है |

8: 23 मार्च 1931 की रात को 7 बजकर 33 मिनट पर वीर भगत सिंह और उनके मित्र राजगुरु एवं सुखदेव को फांसी दी गयी थी |

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