3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग

3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग और कहते है कि भारत की भूमि संतों और देवों की है, इस धरा पर कई महान, ताकतवर लोगों ने जन्म लिया है। प्राचीन मनुष्य के लोगों की जुबान में अद्भुत शक्ति हुआ करती थी क्योंकि वे
 
3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग

3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग और कहते है कि भारत की भूमि संतों और देवों की है, इस धरा पर कई महान, ताकतवर लोगों ने जन्म लिया है। प्राचीन मनुष्य के लोगों की जुबान में अद्भुत शक्ति हुआ करती थी क्योंकि वे लोभ, ईर्ष्या, काम, क्रोध से काफ़ी दूर रहते थे। योग एक ऐसा माध्यम था जिससे वे इस तरह की शक्तियों को प्राप्त कर लेते थे। आज की इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे है वे 3 श्राप जिनका असर आज भी जारी है।

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युधिष्ठिर का श्राप-

3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग

महाभारत काल दौरान पांच पांडवों में राजा युधिष्ठिर श्रेष्ठ व्यक्ति थे वे धर्मात्मा थे उनकी कई कोई भी बात ठुकराई नहीं जा सकती थी। युधिष्ठिर की माता कुंती के एक पुत्र थे जो भगवान सूर्य का वरदान होने की वजह से सूर्य पुत्र कर्ण कहलाए, परन्तु कुंती ने यह बात पाँचो बेटों से छिपा कर रखी थी। युद्ध पूर्ण होने के बाद जब माता कुंती इस राज को खोल देती है और जब युधिष्ठिर इस बात को सुनते है तो दुखी होकर वे अपनी स्त्रीजाति को श्राप दे देते है कि आज के बाद कोई भी स्त्री किसी भी बात को अधिक समय तक गुप्त नहीं रख सकेगी। इसी वजह से आज भी लोग मानते है कि स्त्री के पेट में कोई बात अधिक समय तक नहीं पचती।

श्री कृष्ण का श्राप-

3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग

महाभारत दरम्यान श्री कृष्ण ने अश्वथामा को श्राप दिया था कि वह इस संसार के अंत तक इस जगत में भटकता रहेगा। कहा जाता है कि आज भी गुरु द्रोण के पुत्र अश्वथामा इस संसार में जीवित है। इस बात की पृष्ठि ज़ी न्यूज़ मीडिया की टीम भी कर चुकी है जिसकी वीडियो आप नीचे देख सकते है।

तुलसी का श्राप-

3 ऐसे अद्भुत श्राप जिनका प्रभाव आज भी देखने को मिलता है और जिन्हें मान चुके हैं लोग

प्राचीन समय में शंखचूड़ नामक राक्षस हुआ जिसका वर्णन शिव पुराण में दिया गया है। इस राक्षस की पत्नी तुलसी थी जो बहुत पतिव्रता थी। भगवान विष्णु ने राक्षस का वध करने के लिए शंखचूड़ का रूप धारण किया और तुलसी का शील भंग किया, जिसके बाद तुलसी ने भगवान विष्णु को शिला होने का श्राप दे दिया था इसी वजह से शालीग्राम शिला के रूप में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

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