जाने शास्त्रों में केसे लिखा है कलयुग का अंत , आप भी चौंक जायेंगे

कलयुग को शास्त्रों में बहुत ही ज्यादा कठिनाई का युग माना जाता है। यह एक कारागार है जहां मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण जन्म लेता है। इस दुख वाले युग में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पूर्णतया चिंता रहित होकर एक आनंदमई जीवन व्यतीत करता है। परंतु यदि तुलना की जाए तो
 
जाने शास्त्रों में केसे लिखा है कलयुग का अंत , आप भी चौंक जायेंगे

कलयुग को शास्त्रों में बहुत ही ज्यादा कठिनाई का युग माना जाता है। यह एक कारागार है जहां मनुष्य अपने बुरे कर्मों के कारण जन्म लेता है। इस दुख वाले युग में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो पूर्णतया चिंता रहित होकर एक आनंदमई जीवन व्यतीत करता है। परंतु यदि तुलना की जाए तो हम उस समय के अपेक्षा अभी बहुत बेहतर स्थिति में है, जब कलयुग अपने अंतिम चरण पर होगा। इस युग के विषय में भगवत पुराण में सुखदेव जी ने विस्तार पूर्वक वर्णन किया है,

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कलयुग के अंत में केवल गर्मियों का बोलबाला होगा। उस समय लोग भगवान में विश्वास ही नहीं करेंगे। परमात्मा तथा मनुष्यों के बीच एक अविश्वसनीय दूरी होगी। कलयुग के अंत में व्यक्ति की औसत आयु के केवल 20 वर्ष रह जाएगा अर्थात केवल 16 वर्ष की आयु में ही बाल सफेद होने लगेंगे। समय बढ़ने के साथ इंसान का कद भी छोटा होता जाएगा। बहुत छोटे-छोटे कारणों से भी लोग एक दूसरे की हत्या करने में कोई संकोच नहीं करेंगे।

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जब घोर कलयुग होगा तब क्रोध, वासना, अहंकार, इच्छाएं तथा वस्तुओं से लगाव चरण सीमा पर होगा। लोग केवल स्वयं को ही महत्वपूर्ण देंगे। माता-पिता भाई-बहन जैसे रिश्तो में भी कोई स्नेह प्रेम, परवाहा और सेवा की भावना ही नहीं बचेगी। शास्त्रों के उल्लेख के अनुसार जब कलयुग अपनी चरम सीमा पर होगा, तब शोषण, जुआ, शराब, व्यभिचार आदि यह एक साधारण सी बात ही होगी।

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वैसे तो वर्तमान समय में भी यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन कलयुग के अंत में प्रत्येक व्यक्ति इन कुकर्म में भाग लेगा। ऐसी गतिविधियां साधारण जीवन यापन का एक हिस्सा हो गई हैं। कलयुग के अंत में लगभग सभी लोग रोग ग्रस्त और अस्वस्थ होंगे। कलयुग समाप्ति पर भगवान के शुद्ध भक्ति पूजा में विश्वास करेंगे। भोजन, पानी तथा अन्य प्राकृतिक सुविधाओं की पूरी धरती पर कमी हो जाएगी। नदियां सूख जाएंगी, आकाश प्रदूषण से काला दिखने लगेगा, दरिद्रता, भूख, प्यास पूरी तरह फैल जाएगी। घोर कलयुग के दौरान कोई धार्मिक कार्य न होने के कारण चारो और केवल नकारात्मक ही होगी। और प्रत्येक व्यक्ति केवल बुराई की ओर ही ग्रस्त होगा।

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सबको केवल धन की ही अभिलाषा होगी। स्त्रियां 15 वर्ष की आयु से पहले मां बन जाएंगी। कलयुग के 5000 वर्ष पश्चात गंगा नदी पूरी तरह सूख जाएगी, सभी देव अपने अपने लोक लौट जाएंगे। कलयुग के अंत समय में धरती से आने की उपज रुक जाएगी। पेड़ो पर फल नहीं होंगे और गाय भी दूध देना बंद कर देगी। नैतिकता लोगों के जीवन से नष्ट हो जाएगी। भाई अपने सगे भाई की भी हत्या करने में कोई संकोच नहीं करेगा। धरती पर चारों ओर हाहाकार मच जाएगा। अपराधियों की संख्या इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि जो लोग अच्छे होंगे उनके लिए जीवन व्यतीत करना कठिन हो जाएगा।

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मनुष्य पाप की सीमाओं को लांग कर पशुओं से भी नीचे गिर जाएगा। पशुओं और इंसानों में कोई अंतर नहीं रहेगा। इंसान, इंसान को ही खाना शुरु कर देगा। भयंकर गर्मी का मौसम होगा, जिसके कारण एक के बाद एक लोग तड़प तड़प कर मरते रहेंगे। जब बुराइयां चरम सीमा पर होगी और धरती पाप के बोझ तले दब जाएगा, तब भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा। श्रीमद् भागवत के अनुसार भगवान कल्कि संभल गांव के विष्णु यसा नामक ब्राह्मण तथा उनके पत्नी के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे।

भगवान कल्कि एक बहुत विशाल घोड़े पर सवार होकर सब अधर्मियों का नाश करेंगे। कलयुग के अंतिम समय में लगातार वर्षा होगी, जिससे केवल पूरी पृथ्वी पर पानी ही पानी होगा। समस्त धरती पर जल ही जल होने के कारण सभी प्राणियों का अंत हो जाएगा। अब जानते हैं क्या होगा कलयुग के पश्चात। कलयुग के अंतिम चरण पर केवल गिने-चुने लोग ही भगवान के भक्त होंगे। यह लोग सभी बुराइयों से दूर धर्म पालक तथा भगवान के भक्ति में मगन होंगे। केवल ऐसे ही लोग प्रलय के प्रकोप से बचे रहेंगे और सतयुग में प्रवेश करेंगे और भगवान की लीलाओं का आनंद लेंगे।

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