इस मंदिर में जाने से इंसान बन जाता है पत्थर। क्या है रहस्य

भारत ने कई रहस्यमय जगह हैं। जो अपने मे एक अजीब सा रहस्य छूपाये बैठे है। कुछ का रहस्य सामने आया है। और कुछ अभी भी एक रहस्य में ही है। कुछ के पीछे आस्था है। तो कुछ के पीछे डर है। नई सरकारी नौकरियों के लिए यहाँ पर देखें : सरकारी नौकरी करने के
 
इस मंदिर में जाने से इंसान बन जाता है पत्थर। क्या है रहस्य

भारत ने कई रहस्यमय जगह हैं। जो अपने मे एक अजीब सा रहस्य छूपाये बैठे है। कुछ का रहस्य सामने आया है। और कुछ अभी भी एक रहस्य में ही है। कुछ के पीछे आस्था है। तो कुछ के पीछे डर है।

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आज हम बात कर रहे है ऐसे ही एक मंदिर की जिसका रहस्य ऐसा है। 900 साल से रहस्य ही है। ना तो किसी ने जान को जोखिम में डाल कर रहस्य को उजागर करने की हिम्मत नही की।

ये मंदिर है राजस्थान के बाड़मेर जिले के हाथमा गांव का जिसका नाम है। किराड़ू मंदिर। कहते हैं, की एक संत के श्राप के कारण इस मंदिर का ऐसा डर है। जो भी इस मंदिर में रात को रुकता है। वो पत्थर का बन जाता है। तो आओ जानते हैं। क्या है इसके पीछे की कहानी।

ये बात 900 साल पुरानी है। जब यहाँ पर परमारों का शासन था। तो उनके राज्य में एक संत और उनकी शिष्यों की एक टोली भी आयी। कुछ समय बाद संत अपने शिष्यों को राज्य के हवाले छोड़ कर तीर्थ यात्रा पर चले गए और कहा कि इनके खाने पीने का ध्यान रखे।

इस मंदिर में जाने से इंसान बन जाता है पत्थर। क्या है रहस्य

संत के जाने के बाद उनके सारे शिष्य भूख प्यास से दुखी हुये साथ ही साथ बीमार पड़ गए और बस एक कुम्हारिन को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति ने उनकी सहायता नहीं की। बहुत दिनों के बाद जब संत दुबारा उस शहर में लौटे तो उन्होंने देखा कि मेरे सभी शिष्य भूख से तड़प रहे हैं और वे बहुत बीमार हैं। यह सब देखकर संत को बहुत गुस्सा आया।

उस संत ने कहा कि जिस स्थान पर साधु संतों के प्रति दयाभाव ही नहीं है, तो अन्य के साथ क्या दयाभाव होगा। ऐसे स्थान पर मानव जाति को नहीं रहना चाहिए। उन्होंने क्रोध में अपने कमंडल से जल निकाला और हाथ में लेकर कहा कि जो जहां जैसा है, शाम होते ही पत्‍थर बन जाएगा। उन्होंने संपूर्ण नगरवासियों को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया।

उसके बाद जिस कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की सेवा की थी, उसे बुलाया और कहा कि तू शाम होने से पहले इस शहर को छोड़ देना और जाते वक्त पीछे मुड़कर मत देखना। कुम्हारिन शाम होते ही वह शहर छोड़कर चलने लगी लेकिन जिज्ञासावश उसने पीछे मुड़कर देख लिया तो कुछ दूर चलकर वह भी पत्थर बन गई। इस श्राप के चलते पूरा गांव आज पत्थर का बना हुआ है। जो जैसा काम कर रहा था, वह वैसा ही पत्थर का बन गया।

इस श्राप के कारण ही आस-पास के गांव के लोगों में दर का माहौल फैल गया। जिसके चलते आज भी लोगों में यह मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में सूरज ढलने के बाद कदम रखेगा या रुकेगा, वह भी पत्थर का बन जाएगा।

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