ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में, इन्हें करने चाहिए ये उपाय

ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में: शनि देव कर्मफल दाता माने जाते हैं, कुंडली में मौजूद सभी 9 ग्रहों में से एक है शनि ग्रह, लेकिन इसे पापी ग्रह के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा राहु और केतु को भी पापी ग्रह कहा गया है, क्योंकि ये तीन ग्रह जिस
 
ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में, इन्हें करने चाहिए ये उपाय

ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में: शनि देव कर्मफल दाता माने जाते हैं, कुंडली में मौजूद सभी 9 ग्रहों में से एक है शनि ग्रह, लेकिन इसे पापी ग्रह के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा राहु और केतु को भी पापी ग्रह कहा गया है, क्योंकि ये तीन ग्रह जिस भी किसी की कुंडली में जाकर बैठते हैं वहां उथल-पुथल ही मचा देते हैं। यह भी सबसे बड़ा कारण है कि क्यों लोग शनि देव से इतना डरते हैं। क्यों वे अपने जीवन में कम से कम शनि ग्रह से जुड़े उपाय जरूर करते हैं। क्योंकि शनि देव कभी ना कभी लौटकर उन्हें नुकसान पहुंचाते जरूर हैं। शनि कर्मफल दाता माने जाते हैं, जो जातक को बुरे कर्मों पर बुरा फल समय आने पर देते जरूर हैं। बेशक ऐसा करने में थोड़ा समय लग जाए, लेकिन जातक को उसके किए बुरे कर्मों का फल मिल जरूर जाता है।

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आज हम आपको शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या और शनि के चक्र के बारे में कुछ जानकारी देंगे। और फिर बताएंगे कि शनि मौजूदा समय में किन-किन राशियों पर हावी हैं।

शनि की दशा

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि धीमी चाल वाला ग्रह है, जो किसी भी राशि में आने के बाद कम से कम ढाई साल तक रहता है। इतना ही नहीं, उस विशेष राशि में भी शनि की चाल मंद गति वाली ही होती है जिसके कारण जातक को नुकसान तो होता है, लेकिन वह भी थोड़े-थोड़े समय में।

शनि की कुल दशा 19 वर्ष होती है और इसके अलावा साढ़ेसाती तथा दो ढैय्या का समय जोड़ा जाए तो शनि किसी के भी जीवन को लगभग 31 साल तक प्रभावित करता है। तो यदि आपकी राशि में इस समय शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है तो वह समाप्त होने के ठीक 30 या 31 साल बाद फिर से आएगी यह तय है।

इस सबके अलावा ज्योतिष शास्त्र यह भी कहता है कि शनि की दशा चल रही हो या ना चल रही हो, लेकिन फिर भी शनि देव की क्रूर दृष्टि हर जातक पर बनी ही रहती है।

ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में, इन्हें करने चाहिए ये उपाय

शनि की साढ़ेसाती

बहरहाल अब बात करते हैं कि किन-किन राशियों पर इस समय शनि देव की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव टेढ़ी नजर वाले हैं, तो यदि वे किसी एक राशि पर विराजमान भी हों, किंतु उनकी नजर उनसे आगे की और पीछे की राशि पर भी बनी रहती है।

इस समय शनि ग्रह धनु राशि में है, तो एस्ट्रोलॉजी के अनुसार धनु राशि के साथ-साथ वृश्चिक राशि और मकर राशि के जातक भी शनि देव की क्रूर दृष्टि का पूर्ण रूप से शिकार हैं। यदि इन तीन राशियों की कुंडली में मौजूदा समय में शनि संबंधित कोई भी अशुभ दशा चल रही है, तो उन्हें जल्द से जल्द उपाय करवा लेने चाहिए। अन्यथा मुसीबतें और भी बढ़ती चली जाएंगी।

ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में, इन्हें करने चाहिए ये उपाय

शनि की ढैय्या

धनु, वृश्चिक और मकर पर चल रही शनि साढ़ेसाती के अलावा इस समय वृषभ और कन्या राशि की ढैय्या चल रही है। तो इन सभी राशियों को तो कम से कम शनि ग्रह संबंधित उपाय कर लेने चाहिए।

यहां जानिए शनि देव को प्रसन्न करने के या रही शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रकोप से बचने के उपाय
शनि बीज मंत्र का जाप प्रतिदिन कम से कम 108 बार अवश्य करें।

ये 5 राशियां हैं शनि देव के घेरे में, इन्हें करने चाहिए ये उपाय

शनि स्तोत्र पाठअवश्य करें

काले घोड़े की नाल अथवा नाव की कील से बनी हुई अंगूठी को दाएं हाथ की मध्यमा अंगुलि में शनिवार के दिन प्रातः शनि बीज मंत्र की 108 बार स्तुति के पश्चात ही धारण करें। ध्यान रहे कि उस अंगूठी को शुक्रवार की रात में सरसो के तेल में डुबो कर रख दें और धारण करने के बाद उस तेल का दीपक जला दें।

यदि कोई पीड़ित जातक उपरोक्त को करने में अक्षम हो, तो उसे हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए।

शनि प्रकोप से मुक्ति के लिए सुंदर काण्ड का नियमित पाठ अवश्य करें।

शिव आराधना से भी शनि प्रकोप से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है।

शनि मृत्युञ्जय स्तोत्रं से भी शनि प्रकोप से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है।

ये मंत्र विस्तारित है किंतु शनि बीज मंत्र तथा स्तोत्र के पश्चात इसका पाठ शनि को सर्वाधिक प्रसन्न करता है। यदि कुण्डली में भी शनि की स्थिति काफी खराब हो तब इसका स्तवन जातक को बेहद राहत प्रदान करने में सक्षम है।

उपरोक्त बताए गए उपायों में से यदि रोजाना आप कोई 2 उपाय भी करते हैं तो आपके ऊपर मंडरा रहा शनि देव का बुरा साया कम हो जाएगा। यह पोस्ट पढ़ने के बाद ‘जय शनि देव’ कमेंट करें।

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